Friday, March 6, 2015

बासंती खुरचन

रंग पलाशी भीनी पुलकन
चलो चुगें बासंती खुरचन

कुछ फगुनाई कुछ अकुलाई
गालों पर चटकी अरुणाई
झाँक झरोखे से मुस्काई
ओट ओढ़नी की शरमाई
उषा किरण सी प्यारी दुल्हन

गुल गुलाल से अंग महकते
फाग रागिनी सभी बहकते
ढोल बाँसुरी चंग चहकते
बूढ़े बच्चे चलें ठुमकते
मन उपवन सब नंदन नंदन 

मधुर मधुर मिश्री की डलियां
फागुन की अल्हड़ कनबतियां
रागरंग में डूबी सखियाँ
मस्त मस्त हैं मधुकर कलियाँ
आज न आड़े कोई अडचन



9 comments:

  1. हो ली की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (08-03-2015) को "होली हो ली" { चर्चा अंक-1911 } पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. सुंदर अभिव्यक्ति...बासंती रंग में रंगी एक अच्छी रचना...

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  3. बहुत सुंदर अभिव्‍यक्ति...।

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  4. शानदार भावसंयोजन , बढ़िया है आपको बहुत बधाई

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  5. मधुर मधुर मिश्री की डलियां
    फागुन की अल्हड़ कनबतियां
    रागरंग में डूबी सखियाँ
    मस्त मस्त हैं मधुकर कलियाँ
    आज न आड़े कोई अडचन ..
    फागुन की खुशियाँ यूँ ही बिखेर दीं आपने शब्दों के जरिये ...
    बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ...

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  6. आयुर्वेदा, होम्योपैथी, प्राकृतिक चिकित्सा, योगा, लेडीज ब्यूटी तथा मानव शरीर
    http://www.jkhealthworld.com/hindi/
    आपकी रचना बहुत अच्छी है। Health World यहां पर स्वास्थ्य से संबंधित कई प्रकार की जानकारियां दी गई है। जिसमें आपको सभी प्रकार के पेड़-पौधों, जड़ी-बूटियों तथा वनस्पतियों आदि के बारे में विस्तृत जानकारी पढ़ने को मिलेगा। जनकल्याण की भावना से इसे Share करें या आप इसको अपने Blog or Website पर Link करें।

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  7. बहुत ही प्यारी ध्वनि आ रही इस कविता से.

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  8. .बासंती रंग में रंगी रचना...

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आपकी बहुत बहुत आभारी हूँ कि अपना बहुमूल्य समय देकर आपने मेरा मान बढाया ...सादर

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