Sunday, April 1, 2012

बुर्जुआ पूंजीपति



फ्लडलाइटों की चकाचौंध के बीच
अचानक दिखने लगती है
चाँद की उदासी मुझे
उकेरना होता है जब
लाजवाब शब्द चित्र कोई
कोस लेती हूँ मैं
निरंतर कद बढ़ा रही अट्टालिकाओं को
जब लगता है इन्हीं की वजह से
नहीं पहुँच पाई
मेरे आँगन में
मेरे हिस्से की धूप
सुर मिलाती हूँ उन आवाजों के साथ
जो गाती हैं क्रान्तिगान
सत्ता और पूँजी की जुगलबंदी के खिलाफ
स्वतः ही जुड जाता है अपनापा
खेत जमीन नदी पहाड़ के साथ
गहरे निकट सम्बन्धी प्रतीत होते हैं
मजदूर किसान
उनकी बेबसी लाचारी
सब अपनी सी लगती है
किन्तु जब देखती हूँ
विश्व-बाज़ार में
मायावी कंचन-मृग कोई
तो मंत्रमुग्ध सा चल पड़ता है
उसके पीछे
मेरे मन में छुपा बैठा
बुर्जुआ पूंजीपति कोई 

19 comments:

  1. ये चकाचौंध की माया अगर बर्जुआ पूंजीपति न भी बैठा हो तो भी उसको जागृत कर देती है ...
    गहरी रचना है ..

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  2. वाह!!!!!

    गहन भाव..............
    अद्भुत....

    अनु

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  3. कंचन मृग की माया ने तो रामायण ही रच दिया...

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  4. यही बाजारवाद का कमाल है ...... अच्छी प्रस्तुति .

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  5. बर्जुआ पूंजीपति ..जो साम्यवाद लाने की बात करता है पर पूंजीवादी व्यवस्था पर कुंडली मार कर..और हम है कि अपने को देखना ही नहीं चाहते हैं..

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  6. This comment has been removed by the author.

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  7. अंतर्मन की द्विविधा का बहुत सटीक और सुन्दर चित्रण...

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  8. This comment has been removed by the author.

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  9. बदलते साम्यवादी,
    साम्यवाद की बदलती परिभाषायें।
    बहुत सुन्दर....बधाई...

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  10. गहन भाव लिए अद्भुत अभिव्यक्ति...बहुत सुन्दर...

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  11. मौजूदा दौर का यथार्थ बहुत सटीक ढंग से प्रतिबिंबित हुआ है.फ्लडलाइटों की चकाचौंध से चांद का उदास होना, ऊंची अट्टालिकाओं के कारण अपने हिस्से की धूप नहीं पहुंच पाने के कारण उभरता आक्रोश, विश्व बाज़ार में मायावी कंचन मृग के पीछे मंत्रमुग्ध सा भागता मन के अन्दर छुपा बुजुर्वा पूंजीपति इन बिम्बों के जरिये क्या कुछ नहीं कह डाला आपने. बिलकुल कालजयी रचना है यह. सचमुच पढ़कर तबीयत खुश हो गयी. बधाई!

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  12. बहुत ही अच्छी कविता उम्दा चिंतन के साथ |

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  13. अंतर्द्वान्दात्मक रचना ..
    सुन्दर

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  14. हमारे स्वभाव को पूरी सच्चाई के साथ दर्शाती रचना ...सुन्दर और गहन !

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  15. नहीं पहुंच पाई
    मेरे आंगन में
    मेरे हिस्से की धूप..

    वाह, क्या बात है !
    सुंदर भावों की अच्छी अभिव्यक्ति।

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  16. अभिव्यक्ति स्पष्ट है ...
    शुभकामनायें आपको !

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आपकी बहुत बहुत आभारी हूँ कि अपना बहुमूल्य समय देकर आपने मेरा मान बढाया ...सादर

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