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Thursday, November 20, 2014

बंधन

(1)

छटपटाकर निकली
घूंघट
और
बुर्केनुमा
कोकून से बाहर
अब खुश हैं
हाथों पर दस्ताने
और चेहरे पर
स्कार्फ लपेटे
तितलियाँ

(2)

उन्हें भी
कहाँ सुकून देते हैं
ये तराशे हुए बगीचे
फिर-फिर 
बुलाते हैं
बेतरतीब फैले जंगल
जंगल पर खुला आसमान
लेकिन लौटकर दुबक रहीं हैं
चिड़ियाएँ
बाज के पैंतरे देखकर



चित्र गूगल से साभार 

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