Tuesday, November 27, 2012

जलता एक दिया


न जाने किस शह में उसका रहमोकरम छुपा हो
मुमकिन है बद्दुआ किसी की मेरे लिए दुआ हो

पासे तो हैं ऊंट न जाने किस करवट  बैठेंगे
खेलो तुम ऐसे कि जैसे जीवन इक जुआ हो

खार भी दामन पकड़ेंगे जब गुलशन से गुजरेंगे
भूल उन्हें यूँ चल देना फूलों ने जैसे छुआ हो

जब दौरे तूफाँ होंगे हम झुका के सर बैठेंगे
रहे भरम उसी के डर से मैंने सजदा किया हो

किसी मंदिर की हो चौखट या रहो में रहेंगे
है अरमां बस इतना कि जीवन जलता एक दिया हो

रेगिस्तानों में तो केवल वे ही फूल खिलेंगे
हर आंसू को जिसने मरहम समझ लिया हो 





20 comments:

  1. रेगिस्तानों में तो केवल वे ही फूल खिलेंगे
    हर आंसू को जिसने मरहम समझ लिया हो

    वाह ! बहुत खूब !!

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  2. रेगिस्तानों में तो केवल वे ही फूल खिलेंगे
    हर आंसू को जिसने मरहम समझ लिया हो,,,

    बेहतरीन गजल,,,वंदना जी,,,

    resent post : तड़प,,,

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  3. कल 30/11/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  4. मन के भावो को खुबसूरत शब्द दिए है अपने..

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  5. अनुपम भाव संयोजित किये हैं आपने ...

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  6. सुन्दर भाव लिए बेहतरीन रचना..
    :-)

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  7. खूबसूरत रचना ,बहुत बढ़िया ।

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  8. जब दौरे तूफाँ होंगे हम झुका के सर बैठेंगे
    रहे भरम उसी के डर से मैंने सजदा किया हो

    ....बहुत खूब! बहुत सुन्दर रचना..

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  9. पासे तो हैं ऊंट न जाने किस करवट बैठेंगे
    खेलो तुम ऐसे कि जैसे जीवन इक जुआ हो ...

    सच कह है ... जीवन में इस एहसास का होना जरूरी है ... हर पल जीवन जुआ ही है ...

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  10. बेहतरीन रचना..सुन्दर भाव*********** जब दौरे तूफाँ होंगे हम झुका के सर बैठेंगे
    रहे भरम उसी के डर से मैंने सजदा किया हो

    किसी मंदिर की हो चौखट या रहो में रहेंगे
    है अरमां बस इतना कि जीवन जलता एक दिया हो

    रेगिस्तानों में तो केवल वे ही फूल खिलेंगे
    हर आंसू को जिसने मरहम समझ लिया हो

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  11. उम्दा, बेहतरीन अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई...

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  12. बहुत ही अच्छा लिखा आपने .बहुत ही भावनामई रचना .बहुत बधाई आपको

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  13. पता नहीं क्यों मैं यहाँ आ गई
    और आ ही गई हूँ तो कर लूँ
    आपसे दोस्ती
    सादर
    यशोदा
    अंधेरों को कर दे जो रोशन,
    वो दीप दोस्‍ती है
    हर आंसू को कर दे मोती,
    वो सीप दोस्‍ती है
    --अरुंधती आमड़ेकर

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  14. किसी मंदिर की हो चैखट या रहो में रहेंगे
    है अरमां बस इतना कि जीवन जलता एक दिया हो

    अच्छी पंक्तियां हैं।

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  15. बहुत ही अच्छी भावपृर्ण रचना ।

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  16. गहन हृदयस्पर्शी लेखन ...बहुत अच्छी रचना ...शुभकामनायें ॥

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  17. बहुत खूब!
    http://voice-brijesh.blogspot.com

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आपकी बहुत बहुत आभारी हूँ कि अपना बहुमूल्य समय देकर आपने मेरा मान बढाया ...सादर

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