Wednesday, November 5, 2014

दिवाली में


सजी दहलीज कंदीलें बुलाती हैं दिवाली में
कतारें नवप्रभावर्ती रिझाती हैं दिवाली में

अमा की रात में कैसे लिखे वो छंद पूनम के
हुनर यह दीपमालाएं सिखाती  हैं दिवाली में

भुलाकर रिश्तों के बंधन डटें हैं सीमा पर भाई
तो बहनें  चैन की बंसी बजाती हैं दिवाली में

जले दीपक से दीपक जब खिले है खील सा हर मन
तो गलियाँ गाँव की हमको  बुलाती हैं दिवाली में

दिये को ओट में रखकर नयन के ज्योतिवर्धन को
ख़ुशी से माँ मेरी काजल बनाती हैं दिवाली में

अकेले भी करो कोशिश अगर तम को हराने की
सफलताएँ सगुन मंगल मनाती हैं दिवाली में

हठीली आग रख सिर पर निभाती है कसम कोई
फिज़ाएं नूर की चादर बिछाती हैं दिवाली में
 
जला कब दीप है बोलो निरी माटी की यह रचना
उजाले बातियाँ स्नेहिल  सजाती हैं दिवाली में

अनूठा दृश्य रचते हैं कतारों में सजे दीपक
विभाएं शुद्ध अनुशासन दिखाती है दिवाली में



तरही मिसरा “ फिज़ाएं नूर की चादर बिछाती हैं दिवाली में“


जनाब एहतराम इस्लाम साहब की ग़ज़ल से 


चित्र गूगल से साभार 

12 comments:

  1. बेहतरीन ग़ज़ल......
    अपना शागिर्द बना लीजिये हमें :-)

    सस्नेह
    अनु

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  2. भुलाकर रिश्तों के बंधन डटें हैं सीमा पर भाई
    तो बहनें चैन की बंसी बजाती हैं दिवाली में

    दिये को ओट में रखकर नयन के ज्योतिवर्धन को
    ख़ुशी से माँ मेरी काजल बनाती हैं दिवाली में

    निशब्द करती पंक्तियाँ , बहुत सुन्दर लिखा है

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  3. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (07.11.2014) को "पैगाम सद्भाव का" (चर्चा अंक-1790)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है।

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  4. अमा की रात में कैसे लिखे वो छंद पूनम के
    हुनर यह दीपमालाएं सिखाती हैं दिवाली में ..
    वाह ... बहुत समय बार इतनो लाजवाब ग़ज़ल पढ़ी है ... हर शेर मोती सा ... औए ये ख़ास शेर तो बार बार गुनगुनाने के लिए हो जैसे ...

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  5. अमा की रात में कैसे लिखे वो छंद पूनम के
    हुनर यह दीपमालाएं सिखाती हैं दिवाली में

    भुलाकर रिश्तों के बंधन डटें हैं सीमा पर भाई
    तो बहनें चैन की बंसी बजाती हैं दिवाली में....

    बहुत खूब....लाजवाब और अर्थपूर्ण अश'आर. खूबसूरत ग़ज़ल. हार्दिक बधाई स्वीकारें.

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  6. अनूठा दृश्य रचते हैं कतारों में सजे दीपक
    विभाएं शुद्ध अनुशासन दिखाती है दिवाली में
    ...बहुत सुन्दर सन्देश देते हैं दीपक ...
    सुन्दर प्रस्तुति

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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  8. इस खूबसूरत तरही मिसरे के साथ बेहद सुंदर ग़ज़ल बुनी है आपने.. "खशी से मा मेरी काजल बनाती है.." वाह. सभी शेर पसंद आये. हार्दिक बधाई.

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  9. दिये को ओट में रखकर नयन के ज्योतिवर्धन को
    ख़ुशी से माँ मेरी काजल बनाती हैं दिवाली में

    निशब्द करती पंक्तियाँ

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  10. बहुत अच्छा लगा सारी रचनाओं को फिर से पढ़ना . शुभकामनाएं..

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आपकी बहुत बहुत आभारी हूँ कि अपना बहुमूल्य समय देकर आपने मेरा मान बढाया ...सादर

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