Sunday, March 16, 2014

कह मुकरियाँ








1


वो रंगीन मिजाजी भाये

रोम रोम गहरे रम जाये

कहने को तो केवल पाहुन

ए सखि साजन ? न  सखि  फागुन !


2


भेद हृदय के सारे खोले

जादू तो बस सिर चढ़ बोले

करे असर बौराये सर्वांग

का सखि साजन ? न सखि भांग !



11 comments:

  1. बहुत सुन्दर...
    मन किया कि बस दो??? और पढने को जी चाहा..
    :-)
    होली की शुभकामनाएं...
    सस्नेह
    अनु

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  2. अति सुंदर प्रस्तुति...!
    सपरिवार रंगोत्सव की हार्दिक शुभकामनाए ....
    RECENT पोस्ट - रंग रंगीली होली आई.

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  3. आपकी लिखी रचना बुधवार 19 मार्च 2014 को लिंक की जाएगी...............
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  4. मस्त ... पढते ही जाओ जैसे ...
    आपको और परिवार में सभी को होली कि हार्दिक बधाई ...

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  5. बहुत सुंदर.... होली की शुभकामनाएं ....

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  6. वाह .......... बहुत खूब
    होली की अनंत शुभकामनाएं

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  7. बहुत खूब..होली की आपको सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं!

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  8. सुन्दर । अमीर खुसरो की कह मुकरियाँ बहुत प्रसिद्ध हैं । पिताजी हमें बहुत सारी मुकरियाँ सुनाया करते थे । उनमें से कुछ यहाँ हैं---
    1
    रात समय वह मेरे आवे
    भोर भये वह घर उठि जावे
    यह अचरज है सबसे न्यारा
    ऐ सखि साजन? ना सखि तारा!
    2
    ऊंची अटारी पलंग बिछायो
    मैं सोई मेरे सिर पर आयो
    खुल गई अंखियां भयी आनंद
    ऐ सखि साजन? ना सखि चांद!
    3
    जब माँगू तब जल भरि लावे
    मेरे मन की तपन बुझावे
    मन का भारी तन का छोटा
    ऐ सखि साजन? ना सखि लोटा
    4
    वो आवै तो शादी होय
    उस बिन दूजा और न कोय
    मीठे लागें वा के बोल
    ऐ सखि साजन? ना सखि ढोल!

    ReplyDelete
  9. सुन्दर । अमीर खुसरो की कह मुकरियाँ बहुत प्रसिद्ध हैं । पिताजी हमें बहुत सारी मुकरियाँ सुनाया करते थे । उनमें से कुछ यहाँ हैं---
    1
    रात समय वह मेरे आवे
    भोर भये वह घर उठि जावे
    यह अचरज है सबसे न्यारा
    ऐ सखि साजन? ना सखि तारा!
    2
    ऊंची अटारी पलंग बिछायो
    मैं सोई मेरे सिर पर आयो
    खुल गई अंखियां भयी आनंद
    ऐ सखि साजन? ना सखि चांद!
    3
    जब माँगू तब जल भरि लावे
    मेरे मन की तपन बुझावे
    मन का भारी तन का छोटा
    ऐ सखि साजन? ना सखि लोटा
    4
    वो आवै तो शादी होय
    उस बिन दूजा और न कोय
    मीठे लागें वा के बोल
    ऐ सखि साजन? ना सखि ढोल!

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  10. वाह बहुत बढ़िया ......मुकरियों के विषय में नई जानकारी मिली ॥आभार

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आपकी बहुत बहुत आभारी हूँ कि अपना बहुमूल्य समय देकर आपने मेरा मान बढाया ...सादर

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