Saturday, October 29, 2011

शक्ति सृजन की

अस्मिता की खोज में
मेरे मन की
शुचिता को
मिली जब भी
तुम्हारी ओर से
अवमानना
निरंतर जलती रही
उपेक्षा और अविश्वास
के आँवाँ में
किन्तु अब
हो गयी हैं परिपक्व
मेरी पीडाएं
परिभूत होकर भी
इतनी परिपक्व
कि बन सकती हैं
आहुति
किसी आश्रय यज्ञ की
एक मजबूत ईंट सी
क्योंकि होती है
वेदना में
शक्ति सृजन की
Siti Hawa, 38, making bricks at a brick factory in the village of Tungkop, Aceh, on Monday. In Aceh, most women work in various sectors to contribute to the livelihood of their families. (EPA Photo)

17 comments:

  1. क्यूंकि होती है
    वेदना में
    शक्ति सर्जन की

    बहुत अच्छी लगी आपकी यह अभिव्यक्ति,वंदना जी.वेदना में भी शक्ति का अहसास कराती हुई.
    सकारात्मक चिंतन के लिए बधाई.

    आभार.

    मेरे ब्लॉग पर आपका इंतजार है,जी.

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  2. स्नेहिल सृजन , भावनाओं का सुंदर चित्रण प्रभावशाली है ......मुबारक हो /

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  3. सही कहा आपने,
    वेदना ही तो सृजन का स्रोत है।
    सुंदर कविता।

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  4. कल 31/10/2011को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  5. बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

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  6. भावनावो की सुन्दर अभिव्यक्ति...

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  7. क्यूंकि होती है
    वेदना में
    शक्ति सर्जन की
    सुन्दर भाव .. अनुभूति

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  8. ... अब हो गयी परिपक्व मेरी पीडाएं....

    सुन्दर अभिव्यक्ति...
    सादर...

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  9. Bahut sundar...


    http://www.poeticprakash.com/

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  10. क्योंकि होती है वेदना में शक्ति सृजन की.............बहुत सुन्दर.....शानदार पंक्तियाँ|

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  11. सृजन की शक्ति को खूब पहचाना है और सुन्दरता से अभिव्यक्त किया है!

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  12. एक सुन्दर अभिव्यक्ति...
    मेरी बधाई स्वीकार करे!

    मेरी नई पोस्ट के लिये पधारे
    जीवन पुष्प
    www.mknilu.blogspot.com

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  13. निस्संदेह वेदना में सृजन की शक्ति है

    मगर सृजन की एक अपनी वेदना है

    सुंदर कविता

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  14. स्त्रियों को आधी दुनिया कहा जाता रहा है ,लेकिन उनमें भावनाओं की हरेक मोड़ पर सर्वाधिक संभावनाएँ हैं .......!

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आपकी बहुत बहुत आभारी हूँ कि अपना बहुमूल्य समय देकर आपने मेरा मान बढाया ...सादर

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