Sunday, July 24, 2011

लौटना चाहता हूँ

माँ
याद आती है
छवि तुम्हारी
द्रुतगति से
काम में तल्लीन
कहीं नीला शांत रंग
कहीं उल्लसित गेरू से पुती
दीवारें कच्ची
माटी के आँगन पर उभरती
तुम्हारी उँगलियों की छाप थी
या कि रहस्यमयी नियति की
तस्वीर सच्ची
तुम नहीं थी
आज की नारी जैसी
जो बदलती है करवटें रात भर
और नहीं चाहती
परम्परा के बोझ तले
साँसें दबी घुटी सी
पर चाहती है गोद में बेटा
सिर्फ बेटा
और बेटे से आस पुरानी सी
मैं सुनता हूँ उसकी सिसकती साँसे
विविध रंगों के बीच
मुरझाए चेहरों की कहानी कहती
दीवार पर लटकी
किसी महंगी तस्वीर सी
और उधर मैं
फोन के एक सिरे पर
झेलता हूँ त्रासदी
तेरी गोद में
छुप जाने को बैचैन
नहीं कमा पाया मनचाहा
ना ही कर पाया हूँ मनचीती
लौटना चाहता हूँ
तेरे आँचल की छाँव में
डरता हूँ
अगले कदम की फिसलन से
प्रतिनायक बना खड़ा है
मेरा व्यक्तित्व
मेरी प्रतिच्छवि बनकर
क्या सचमुच
मैं यही होना चाहता था
जो आज हूँ
पर सच है
मैं लौटना चाहता हूँ !
मैं लौटना चाहता हूँ !!
लौटना चाहता हूँ !!!

19 comments:

  1. शसक्त रचना , हृदय की आवाज को सुनती व सुनाती हुयी , भावपूर्ण प्रस्तुति ...

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  2. पहली बार पढ़ रहा हूँ आपको और भविष्य में भी पढना चाहूँगा ...... शुभकामनायें

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  3. आज 25- 07- 2011 को आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....


    ...आज के कुछ खास चिट्ठे ...आपकी नज़र .तेताला पर
    ____________________________________

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  4. sundar shabd aur undar bhav....

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  5. आप का बलाँग मूझे पढ कर अच्छा लगा , मैं भी एक बलाँग खोली हू
    लिकं हैhttp://sarapyar.blogspot.com/

    आपको मेरी हार्दिक शुभकामनायें.

    अगर आपको love everbody का यह प्रयास पसंद आया हो, तो कृपया फॉलोअर बन कर हमारा उत्साह अवश्य बढ़ाएँ।

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  6. per chahti hai god mein beta..sirf beta..aur bete se aas purani si..sundar bhavmayi rachna..dil ko choo leti hai

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  7. बहुत अच्छी लगी आपकी यह कविता।


    सादर
    -----------
    कल 26/07/2011 को आपकी एक पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  8. प्रशंसनीय रचना.....सुन्दर

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  9. सुंदर प्रस्तुति. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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  10. बहुत खूबसूरती से लौटने की बात लिखी है ... अच्छी प्रस्तुति

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  11. bahut hi bhawmayi khwahish lautne kee .... kisi panchi kee tarah

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  12. सुंदर प्रस्तुति. आभार.

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  13. सुन्दर /उत्कृष्ट और सराहनीय कविता बधाई और शुभकामनायें |

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  14. सुन्दर,भावपूर्ण अनुपम अभिव्यक्ति.

    मार्मिक और हृदयस्पर्शी भाव दिल को छूते हैं.

    शानदार प्रस्तुति के लिए आभार.


    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है.

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  15. Maa ko samarpit bahut hi sundar rachna ke liye aabhar!

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  16. आपको शुभकामनायें .

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  17. वंदना जी ,
    आपकी ये रचना अच्छी लगी इसे टिप्स हिंदी में ब्लॉग के "काव्य मंच" के पेज़ पर पेस्ट किया गया है | यदि आपको कोई एतराज हो कृपया मुझे सूचित जरूर करें |

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आपकी बहुत बहुत आभारी हूँ कि अपना बहुमूल्य समय देकर आपने मेरा मान बढाया ...सादर

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