Thursday, November 4, 2021

शुभकामना

 चौक चौक चन्दन चर्चित हो

         दिव्य ज्योत हो पावन

नई सोच के अभिनंदन से

         आलोकित घर आंगन


स्नेह शेष रहे जीवन भर

          नवल विभा मुस्काये

आत्मदीप्त हों जुगनू के सम

         गीति स्वस्तिक गाये


मुक्त वर्तिका हो ऐंठन से

         स्नेहसिक्त ज्योतिर्मय

क्षणभंगुर नश्वर जीवन का

          हर पल हो मंगलमय

        


Saturday, September 25, 2021

कश्ती न ये जादुई बादबानी

 (भुजंग प्रयात छंद)


ज़माना कहेगा जिसे मां भवानी


अनूठी रहे याद ऐसी निशानी


पढूंगी बढूंगी रुकूंगी कभी ना


बनूं प्रेरणा मैं लिखूं वो कहानी


खिलें यत्न मेरे चली मैं अकेेली


भले नाव मेरी हवा की सहेली


चुनौती सभी जीतना चाहती हूं


कि कश्ती न ये जादुई बादबानी


मुझे व्याधि आंधी न कोई सताये


नदी पार आशा बुलाए रिझाये


इरादे भरोसे स्वयंसिद्ध मेरे


मिली शक्ति कोई मुझे आसमानी

 - वंदना

Friday, November 13, 2020

दीवाली के दोहे

 बांह पकड़ कर दीप की 

बोली नई कपास

गीत लिखेगी रोशनी 

ले स्नेहिल विश्वास

आभा का  संकल्प ले

जले देहरी दीप

नव आशाएं उर धरे

जैसे मोती सीप

  

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