Saturday, May 7, 2011

अर्थ की तलाश में


नदी की तरह
पर्वतों से समंदर तक
एक तयशुदा रास्ता
हर कोई बह लेता है
धारा के साथ
पर टीलों से टीलों तक
नित जगह बदलते
धोरों के बीच
अर्थ की तलाश में
भटकते रह कर
किरकिरे अस्तित्व का
रेगिस्तान हो जाना
मायने रखता है !

10 comments:

  1. अर्थ की तलाश में
    भटकते रह कर
    किरकिरे अस्तित्व का
    रेगिस्तान हो जाना
    मायने रखता है !

    पढ़ कर बस मुँह से निकला वाह ... बहुत सुन्दर

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  2. चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर आपकी प्रस्तुति मंगलवार 10 - 05 - 2011
    को ली गयी है ..नीचे दिए लिंक पर कृपया अपनी प्रतिक्रिया दे कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ ...शुक्रिया ..

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  3. marmik bodhgamy srijan ..bahut kuchh kahata ---
    sadhuvad ji .

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  4. aakhir ki 5 panktiyaan sabhi kuch keh gayi!

    bahdai

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  5. वाह बेहद प्रभावी रचना है.

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  6. किरकिरे अस्तित्व का रेगिस्तान हो जाना मायने रखता है ...
    वाह !

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  7. बहुत सार्थक लेखन

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आपकी बहुत बहुत आभारी हूँ कि अपना बहुमूल्य समय देकर आपने मेरा मान बढाया ...सादर

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