Sunday, March 27, 2011

हम रहेंगे ....

मेरे पास भी हैं

अंजुरी भी सपने

सपने नितांत मेरे अपने

जिन्हें चाहिए आकाश

पंख पसारने के लिए

अंतहीन गगन नहीं

बस बाँहों भर आकाश

हम बनें ओस

या फिर

समंदर

अपरिभाषित प्यास तो

होठों पर

फिर भी रहेगी

शत सहस्रों बार सुनी

अनकही कहानी

जिजीविषा

मौन रहकर भी कहेगी

एक बूँद ज्योत्सना

बस एक क्षण

पीड़ा की गली में

सदी दर सदी

और

उल्कापात सा जीवन

बस एक क्षण

क्या जरूरी है कि

चमकें क्षितिज पर

उल्कापात सी

किसी लकीर की तरह

कालजयी अभिमान की

प्राचीर की तरह

हम बनें एक सीढ़ी

किसी एक के लिए

हो संभव

तो अनेक के लिए

हम रहेंगें हमेशा रहेंगे

किसी सफलता की कथा में

या किसी असफल प्रयास की व्यथा में

वर्तमान और इतिहास में

संघर्ष के उत्तराधिकार में

शिराओं में रक्त बनकर बहेंगे

हम रहेंगे..... हमेशा रहेंगे !

2 comments:

  1. दृढ विचार ...अच्छी प्रस्तुति

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  2. This is one step towards changing our negative thoughts into positive thinking. Our focus decides which world we live in.

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आपकी बहुत बहुत आभारी हूँ कि अपना बहुमूल्य समय देकर आपने मेरा मान बढाया ...सादर

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